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गेहूँ की पैदावार के लिए आवश्यक भौगोलिक परिस्थितिया| Geographical conditions required for the production of wheat.

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गेहूँ की पैदावार के लिए आवश्यक भौगोलिक परिस्थितिया| Geographical conditions required for the production of wheat.

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गेंहू की पैदावार तथा उसकी उपज के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएं निम्नलिखित है:-

तापमान :- गेहूं मूलतः शीतोष्ण कटिबंधीय जलवायु का पौधा है। यह साधारणतः ठण्डी जलवायु में होता है। इसको उगते समय औसतन 10o सेण्टीग्रेड तथा पकते समय 20o सेण्टीग्रेड तापमान की आवश्यकता होती है।

वर्षा :- गेहूं के पौधों को अधिक नमी की आवश्यकता नहीं होती इसके लिए साधारणतः वर्षा 50 से 75 सेण्टीमीटर वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है।

मिट्टी :- गेहूं के उपज के लिए बहुत ही उम्दा व उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है। इसके लिए बलुई, दोमट मिट्टी सर्वोत्तम मानी गयी है।

समतल भूमि :- इसके खेती के लिए समतल या क्रमिक उतार-चढाव वाले मैदानी भाग अधिक अनुकूल होते है, क्योंकि इसके खेती में मशीनों का व्यापक प्रयोग होने लगा है।

श्रमिक :- इसकी खेती के लिए श्रमिक पर्याप्त होना चाहिए परन्तु इस खेती में मशीनों का प्रयोग भी किया जाता हैं।

उत्पादन क्षेत्र :- भारत में गेहूं की पैदावार उत्तरप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, आन्ध्रप्रदेश आदि राज्यों में की जाती हैं।

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1) जलवायु (Climate)

गेहूँ ठंडी जलवायु की फसल है।

  • बुवाई के समय: हल्की ठंड (अक्टूबर–नवंबर)

  • विकास के समय: ठंडा व शुष्क मौसम

  • कटाई के समय: गर्म व शुष्क मौसम

तापमान

  • बुवाई: 10–15°C

  • पकने के समय: 20–25°C

उदाहरण: उत्तर भारत (पंजाब, हरियाणा, यूपी) में सर्दियों में गेहूँ अच्छी तरह बढ़ता है।


2) वर्षा (Rainfall)

  • आदर्श वर्षा: 50–75 सेमी

  • अधिक वर्षा नुकसानदेह (रोग/जलभराव)

  • कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई जरूरी

उदाहरण: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नहरों व ट्यूबवेल से सिंचाई कर अच्छी पैदावार होती है।


3) मिट्टी (Soil)

उपजाऊ, जलनिकास वाली मिट्टी सबसे अच्छी।

  • दोमट मिट्टी (Loamy soil) सबसे उपयुक्त

  • जलभराव वाली मिट्टी नुकसान करती है

  • pH लगभग 6–7.5 उपयुक्त

उदाहरण: गंगा के मैदानों की दोमट मिट्टी गेहूँ के लिए आदर्श है।


4) भूमि/भू-आकृति (Relief)

  • समतल भूमि बेहतर

  • पहाड़ी ढलानों पर सिंचाई व मशीनें कठिन

उदाहरण: पंजाब-हरियाणा के समतल खेतों में ट्रैक्टर व हार्वेस्टर से खेती आसान।


5) सिंचाई (Irrigation)

  • वर्षा कम हो तो नियमित सिंचाई जरूरी

  • मुख्य चरण: बुवाई के बाद, कल्ले निकलते समय, दूध अवस्था, दाना भराव

उदाहरण: हरियाणा में नहर सिंचाई से स्थिर उत्पादन मिलता है।


6) धूप (Sunshine)

  • अच्छी वृद्धि के लिए पर्याप्त धूप जरूरी

  • पकने के समय धूप दानों को मजबूत बनाती है

उदाहरण: साफ आसमान वाले शुष्क दिन दाने की गुणवत्ता बढ़ाते हैं।


7) मानव कारक (Human Factors)

  • उन्नत बीज, उर्वरक, आधुनिक तकनीक

  • समय पर बुवाई और रोग नियंत्रण

उदाहरण: उच्च उत्पादक किस्में (HYV) अपनाने से प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ती है।


संक्षेप में (One-line Summary)

ठंडी जलवायु, मध्यम वर्षा/सिंचाई, उपजाऊ दोमट मिट्टी, समतल भूमि और पर्याप्त धूप—ये सभी मिलकर गेहूँ की अच्छी पैदावार सुनिश्चित करते हैं।

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