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लैटेराइट मृदा (मिट्टी) किसे कहते है? इसके निर्माण और इसमें उगने वाली फसल के बारे में बताये ? What is laterite soil? Tell about its construction and the crops grown in it?

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लैटेराइट मृदा (मिट्टी) किसे कहते है? इसके निर्माण और इसमें उगने वाली फसल के बारे में बताये ?

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जमीन के निचे का जल स्तर दिन - प्रतिदिन कम होता जा रहा है| इसे बनाये रखने के लिए आप क्या - क्या कर सकते है?

मिटटी की ऊपरी परत के तेजी से कटाव से निर्मित मृदा को लैटेराइट मृदा (मिट्टी) कहते है। दूसरे शब्दो में लैटेराइट मृदा या लैटेराइट मिट्टी (Laterite) का निर्माण ऐसे भागों में हुआ है, जहाँ शुष्क व तर मौसम बारी-बारी से होता है। यह लेटेराइट चट्टानों की टूट-फूट से बनती है। यह मिट्टी चौरस उच्च भूमियों पर मिलती है। इस मिट्टी में लोहा , ऐल्युमिनियम और चूना अधिक होता है। गहरी लेटेराइट मिट्टी में लोहा ऑक्साइड और पोटाश की मात्रा अधिक होती है। लौह आक्साइड की उपस्थिति के कारण प्रायः सभी लैटराइट मृदाएँ जंग के रंग की या लालापन लिए हुए होती हैं।

लैटराइट मिट्टी वाले क्षेत्र अधिकांशतः कर्क रेखा तथा मकर रेखा के बीच में स्थित हैं। भारत में लैटेराइट मिट्टी तमिलनाडु के पहाड़ी भागों और निचले क्षेत्रों, कर्नाटक के कुर्ग जिले, केरल राज्य के चौडे समुद्री तट, महाराष्ट्र के रत्नागिरि जिले, पश्चिमी बंगाल के बेसाइट और ग्रेनाइट पहाड़ियों के बीच तथा उड़ीसा के पठार के ऊपरी भागों में मिलती है।

लैटराइट मिट्टी में चावल, कपास, गेहूँ, दाल, मोटे अनाज, सिनकोना, चाय, कहवा आदि फसल उगाई जाती है।

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लैटेराइट मृदा (Laterite Soil)
लैटेराइट मृदा वह मिट्टी है जो अधिक वर्षा और ऊँचे तापमान वाले क्षेत्रों में पाई जाती है। इस मिट्टी का रंग सामान्यतः लाल, भूरा या पीला होता है और इसमें लौह (Iron) व एल्युमिनियम की मात्रा अधिक होती है।


1. लैटेराइट मृदा का निर्माण

लैटेराइट मृदा का निर्माण निम्न प्रक्रिया से होता है:

  • जब किसी क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा होती है, तो मिट्टी से सिलिका, चूना, पोटाश और सोडियम जैसे घुलनशील तत्व बह जाते हैं

  • इस प्रक्रिया को लीचिंग (Leaching) कहते हैं।

  • लीचिंग के कारण मिट्टी में लौह और एल्युमिनियम ऑक्साइड शेष रह जाते हैं, जिससे मिट्टी कठोर और कम उपजाऊ हो जाती है।


2. लैटेराइट मृदा की विशेषताएँ

  • रंग: लाल, पीला या भूरा

  • बनावट: कठोर व खुरदरी

  • उपजाऊपन: सामान्यतः कम

  • जल धारण क्षमता: कम

  • खनिज: लौह व एल्युमिनियम अधिक


3. लैटेराइट मृदा में उगने वाली फसलें

उर्वरक और सिंचाई की सुविधा मिलने पर इस मिट्टी में निम्न फसलें उगाई जाती हैं:

  • चाय

  • कॉफी

  • रबर

  • नारियल

  • काजू

  • चावल (कुछ क्षेत्रों में)

  • मसाले (काली मिर्च, इलायची आदि)


4. भारत में लैटेराइट मृदा के क्षेत्र

  • पश्चिमी घाट

  • केरल, कर्नाटक, गोवा

  • तमिलनाडु

  • ओडिशा

  • असम

  • मध्य प्रदेश के कुछ भाग

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