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मानव निर्मित पर्यावरण के कारण प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है| कैसे?

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मानव निर्मित पर्यावरण के कारण प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है| कैसे?

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मानव निर्मित पर्यावरण के कारण प्राकृतिक पर्यावरण को काफी नुकसान पहुँचता है | क्यू की मानव अपनी सुबिधा के लिए अपने आस - पास के पर्यावरण को बदलता रहता है, वे बड़े - बड़े इमारते, स्कूल, सड़क का निर्माण करता जा रहा है जिससे पर्यावरण काफी दूषित होती है, सड़क पर चलने वाली गाड़ियों से निकलने वाली धुआँ, रेलगाड़ी और चिमनियों से निकलनेवाली धुआँ, अस्पताल और कल - कारखानों से निकलनेवाली गंदगी और रासायनिक पदार्थ से हमारे जल प्रदूषित होते है,

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यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। सरल शब्दों में कहें तो, मानव निर्मित पर्यावरण (Man-made Environment) वह सब कुछ है जिसे इंसानों ने अपनी जरूरतों और सुविधाओं के लिए बनाया है, जैसे शहर, सड़कें, कारखाने और बाँध।

जब हम इन चीजों का निर्माण करते हैं, तो अक्सर अनजाने में या अपनी लालच के कारण हम प्राकृतिक पर्यावरण (Natural Environment) को नुकसान पहुँचाते हैं। इसे समझने के लिए यहाँ कुछ मुख्य बिंदु और उदाहरण दिए गए हैं:


1. प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन

मानव निर्मित चीजें बनाने के लिए हमें कच्चा माल चाहिए होता है, जो प्रकृति से आता है।

  • उदाहरण: फर्नीचर, मकान और कागज बनाने के लिए हम भारी मात्रा में जंगलों को काटते हैं (वनों की कटाई)। इससे न केवल पेड़ों की संख्या कम होती है, बल्कि जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास (घर) भी छिन जाते हैं।

2. प्रदूषण (Pollution)

हमारी फैक्ट्रियों, गाड़ियों और बिजली घरों से निकलने वाले अवशेष प्राकृतिक पर्यावरण को जहरीला बना देते हैं।

  • उदाहरण: कारखानों से निकलने वाला केमिकल युक्त गंदा पानी जब नदियों में मिलता है, तो वह जल प्रदूषण फैलाता है, जिससे मछली और अन्य जलीय जीव मर जाते हैं। इसी तरह, वाहनों का धुआँ हवा को प्रदूषित करता है।

3. शहरीकरण और कंक्रीट का जाल

जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ रही है, हम जंगलों और खेती की जमीन को काटकर शहर बसा रहे हैं।

  • उदाहरण: शहरों में चारों तरफ सीमेंट और कंक्रीट की इमारतें होने के कारण जमीन बारिश का पानी नहीं सोख पाती। इससे भूजल स्तर (Groundwater level) गिर जाता है और शहरों में गर्मी भी अधिक बढ़ती है।

4. ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming)

मानव निर्मित मशीनों और उद्योगों से निकलने वाली गैसें (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड) पृथ्वी के तापमान को बढ़ा रही हैं।

  • उदाहरण: अधिक गर्मी के कारण ध्रुवों पर जमी बर्फ (ग्लेशियर) पिघल रही है, जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और तटों पर बसे शहरों के डूबने का खतरा पैदा हो गया है।

5. कचरा और प्लास्टिक का ढेर

इंसानों द्वारा बनाई गई कई चीजें, जैसे प्लास्टिक, प्रकृति में कभी खत्म नहीं होतीं।

  • उदाहरण: प्लास्टिक की थैलियां और बोतलें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को खत्म कर देती हैं और समुद्र में जाकर समुद्री जीवों के लिए काल बन जाती हैं।


निष्कर्ष

संक्षेप में, हम अपनी सुख-सुविधाओं के लिए प्रकृति से जो लेते हैं, उसे सही ढंग से वापस नहीं करते। विकास और प्रकृति के बीच संतुलन (जैसे पेड़ लगाना, सौर ऊर्जा का उपयोग और प्रदूषण कम करना) बनाना अब हमारी सबसे बड़ी जरूरत है।

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