दर्पण क्या है , दर्पण कितने प्रकार के होते है?
दर्पण क्या है , दर्पण कितने प्रकार के होते है? हमारे जीवन में इसकी क्या उपयोगिता है ...
Physics
- asked 9 years ago
- Sunny Solu
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| दर्पण या आइना एक प्रकाशीय युक्ति है जो प्रकाश के परावर्तन के सिद्धान्त पर काम करता है। |
| या दुसरे शब्दों में हम कह सकते है की कांच के दुसरे सतह को जब Silvar के लेप या अन्य विधि से बंद कर दिया जाता है जिससे , उस कांच पर प्रकाश के परावर्तन के सिद्धान्त पर काम करे ऐसे स्थिति में वो कांच दर्पण कहलाता है ... |
| दर्पण सामान्यतः दो प्रकार के होते है..... |
| 1. समतल दर्पण (Plain Mirror ) |
|
समतल दर्पण द्वारा किसी वस्तु का बिंब बनने की प्रक्रिया में निम्नलिखित तीन बातें मुख्य होती हैं : उन्हें समद्विभाजित करता है। इस क्रिया को पार्श्विक उत्क्रमण (Iateral inversion) कहते हैं। इसलिए ये किरणें किसी पर्दे पर वस्तु के वास्तविक (real) बिंब का निर्माण नहीं कर सकतीं। |
| 2. गोलीय दर्पण |
| गोलीय दर्पण (spherical mirror) वे दर्पण हैं जिनका परावर्तक तल गोलीय (स्फेरिकल) होता है। ये दो तरह के हो सकते हैं - उत्तल दर्पण (convex mirror / कान्वेक्स मिरर) (इनका परावर्तक तल बाहर की ओर उभरा हुआ होता है) तथा अवतल दर्पण (concave mirror / कॉनकेव मिरर) (जिनका परावर्तक तल अन्दर की तरफ दबा हुआ होता है)। |
- answered 10 years ago
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दर्पण (Mirrors) ऐसे प्रकाशीय तल (optical surfaces) हैं जो प्रकाश की किरणों के परावर्तन (reflection) के द्वारा या तो प्रकाशपुंज को प्रत्यावर्तित कर देते हैं अथवा उसे एक बिंदु पर अभिसृत (converge) करक बिम्ब (image) का निर्माण करते हैं। प्रकाशीय यंत्रों के, विशेष कर ज्योतिष से संबधित यंत्रों के, निर्माण में दर्पणों ने अत्यंत महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की है।
दर्पण के तल से परावर्तित होते समय प्रकाश की किरणें दो विशेष नियमों का पालन करती हैं। इन नियमों को परावर्तन के नियम (Laws of Reflection) कहते हैं। ये निम्नलिखित हैं:
1. आपाती किरण, आपतन बिंदु पर अभिलंब तथा परावर्तित किरण एक ही समतल में स्थित होते हैं।
2. अभिलंब के साथ आपाती किरण तथा परावर्तित किरण द्वारा बननेवाले कोण परस्पर बनाबर होते हैं। पहले कोण अ (i) को आपतन कोण तथा दूसरे कोण प (r) को परावर्तन कोण कहते हैं।
यदि कोई तल प्रकाश की किरणों का परावर्तन किसी ऐसे प्रकार से करता है जिसमें किरणें उपर्युक्त नियमों का पालन नहीं करतीं तो ऐसा तल दर्पण का तल न होकर विसारी परावर्तक तल (diffusive reflecting surface) कहा जाएगा।
प्राय: सभी दर्पणों की रचना समुचित आकृति के काचतल पर किसी अत्यधिक परावर्तनशील पदार्थ की पतली परत चढ़ाकर की जाती है। यह प्रक्रिया प्राय: निर्वात आलेपन द्वारा संपन्न की जाती है और पदार्थ का चयन उस वर्णक्रम प्रदेश के अनुसार किया जाता है जिसके लिय दर्पण का प्रयोग अभीष्ट है।
दृश्य प्रखंड (visible region) के लिए चाँदी सर्वाधिक परावर्तनीयता (reflectivity) प्रदान करती है, किंतु साधारणतया ऐल्यूमिनियम का ही उपयोग किया जाता है। इसका कारण यह है कि एल्यूमिनियम चाँदी की अपेक्षा अधिक टिकाऊ होता है। इसका कारण ऐल्यूमिनियम ऑक्साइड है, जो ऐल्यूमिनियम के वायुमंडल के संपर्क में आने पर बन जाता है।
- answered 10 years ago
- Community wiki
दर्पणों के उपयोग
अपनी छवि देखने के लिये (प्राय: समतल दर्पण)
गाडियों में - पीछे से आ रही दूसरी गाडियों के देखने के लिये (उत्तल दर्पण)
प्रकाशीय यंत्रों (दूरदर्शी, सूक्ष्मदर्शी आदि) में
प्रकाश को एक बिन्दु पर केन्द्रित करने के लिये
- answered 10 years ago
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